Saturday, 12 July 2014

कार्पोरेट चोर

कार्पोरेट  चोर
एक नवसिखुवा चोर प्रोफेसनल चोर से बोला
मुझको भी चोरी करना सिखा दो भाई,
मैं भी खाऊँ हराम की कमाई,
प्रोफेसनल चोर बोला - अरे ! तुम क्या कर रहे हो भाई,
तुमने तो की है खूब पढ़ाई,
नवसिखुवा चोर बोला - तुमने बिलकुल ठीक कहा है।
पर इस कार्पोरेट की दुनिया में,
मेरे लिए जगह कहाँ है ?
देखते नहीं मेरे जूतों का
घिस-घिस कर कितना बुरा हाल है।
पता ही नहीं चलता है अब तो,
कि जूता पहना है या केवल खाल है।
इतना सुनकर प्रोफेसनल चोर की आँखें भर आईं
चोरी करना सिखाने की, कसम है उसने खाई,
वह बोला - चोरी करना महान काम है।
इसे आसान मत समझना तुम,
इस जालिम दुनिया में, पीछे मत हटना तुम
दिन को रात और रात को दिन समझना तुम
क्योंकि इस भरे बाजार में जो करता जितना बड़ा घोटाला है।
वह उतनी प्रसिद्धि पाकर, अदालत से निर्दाष निकलता है।
इसलिए तो यहाँ नेताओं का बोल-बोला है,
झूठे को तो छोड़ तो, सच्चे का मुँह काला है।

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