फेयरवेल शब्द जब कभी सामने आता है तो किसी अपने से, किसी अज़ीज़ से बिछुड़न का एहसास होने लगता है। जीवन में अपनों से विछोह ग़मगीन कर देता है। हम इससे बच तो नहीं सकते लेकिन इस
पल को यादगार बना कर अपनी स्मृति में सदा के लिये संजो कर अवश्य रख सकते हैं। आज मैं दिनेश कुमार शर्मा आपके समक्ष
इन्हीं भावों को एक सूत्र में पिरोते हुए एक भावभीनी कविता के साथ प्रस्तुत हूँ |
उम्मीद करता हूँ आप सबको यह अवश्य पसंद आएगी |
भोर गमगीन होकर, ख़बर लाई है
दिन भी बैचेन है, धूप घबराई है
आपको हम फेयरवेल, दे दें मगर
दिल सुबकने लगा, आँख भर आई है।
दिन भी बैचेन है, धूप घबराई है
आपको हम फेयरवेल, दे दें मगर
दिल सुबकने लगा, आँख भर आई है।
अनगिनत आपके, हम पर अहसान हैं
फिर भी इस बात से, आप अंजान हैं
भाग्य से ऐसे आप हमें मिले हैं
फिर भी इस बात से, आप अंजान हैं
भाग्य से ऐसे आप हमें मिले हैं
आजकल इस जहाँ में
कहाँ, ऐसे इंसान हैं।
पथ दिखा कर हमें, लो चले छोड़कर
हाँथ मझधार में, लो चले छोड़कर
है बड़ा बेरहम, ये विदाई का दिन
ऐसे श्रीमान आप हमें, लो चले छोड़कर।
हाँथ मझधार में, लो चले छोड़कर
है बड़ा बेरहम, ये विदाई का दिन
ऐसे श्रीमान आप हमें, लो चले छोड़कर।
ऐसा नहीं है कि हम, सहते नहीं हैं
बस ह्रदय का दर्द, हम कहते नहीं है
जब से आपकी विदाई की ख़बर सुनी है
बस तबसे हम, थोड़ा खुश रहते नहीं हैं।
बस ह्रदय का दर्द, हम कहते नहीं है
जब से आपकी विदाई की ख़बर सुनी है
बस तबसे हम, थोड़ा खुश रहते नहीं हैं।
आपसे ही शान, आपसे पहचान देखी है
निष्ठा और समर्पण की, दास्तान देखी है
आपके प्रयासों से, हमने इस विद्यालय की
ज़मीं से आसमाँ तक की उड़ान देखी है।
निष्ठा और समर्पण की, दास्तान देखी है
आपके प्रयासों से, हमने इस विद्यालय की
ज़मीं से आसमाँ तक की उड़ान देखी है।
हम तो कच्ची मिट्टी थे, चन्दन बना दिया
काँच की सूरत में थे, मणि कंचन बना दिया
ये मेहरबानियाँ कभी, भुला नहीं पायेंगे
आप वो पारस हैं, जिसने हम सब को कुंदन बना दिया।
काँच की सूरत में थे, मणि कंचन बना दिया
ये मेहरबानियाँ कभी, भुला नहीं पायेंगे
आप वो पारस हैं, जिसने हम सब को कुंदन बना दिया।
आप जैसा बड़प्पन, नहीं है कहीं
आप जैसा सरल मन, नहीं है कहीं
आपको हम विदा, आज कर दें मगर
आप ऐसा सज़्ज़न, नहीं है कहीं।
आप जैसा सरल मन, नहीं है कहीं
आपको हम विदा, आज कर दें मगर
आप ऐसा सज़्ज़न, नहीं है कहीं।
आप के साथ सब, प्रश्न हल हो गये
आप थे तो, हवा सारे छल हो गये
हम अकेले चले तो, बहुत खार थे
आप के साथ राहों में, गुल हो गये।
आप थे तो, हवा सारे छल हो गये
हम अकेले चले तो, बहुत खार थे
आप के साथ राहों में, गुल हो गये।
थे कदम के निशां, बेहिचक चल पड़े
थामते आये हैं, हम अगर गिर पड़े
जिनसे सीखा उन्हें, कैसे कर दें विदा
क्या बड़ी बात है, हम अगर रो पड़े।
थामते आये हैं, हम अगर गिर पड़े
जिनसे सीखा उन्हें, कैसे कर दें विदा
क्या बड़ी बात है, हम अगर रो पड़े।
श्रेय इनका बड़ा, कुछ जो हम कर सके
बेफिकर हो के अध्यन, गहन कर सके
यूँ कदम दर कदम, मार्गदर्शन मिला
मुश्किलें ढेर थीं, पर सहन कर सके।
बेफिकर हो के अध्यन, गहन कर सके
यूँ कदम दर कदम, मार्गदर्शन मिला
मुश्किलें ढेर थीं, पर सहन कर सके।
ये रब ही जाने कि क्या क्या, ख़्याल अब होगा
ये तय है मन में सभी के, सवाल अब होगा
आप तो जान की मानिंद, हैं हम सबके लिये
आप के बिन यहाँ सभी का, हाल क्या होगा।
ये तय है मन में सभी के, सवाल अब होगा
आप तो जान की मानिंद, हैं हम सबके लिये
आप के बिन यहाँ सभी का, हाल क्या होगा।
माना की ये दौर बदलते जायेंगे।
आप जायेंगे तो कोई और आयेंगे।
मगर आपकी कमी इस दिल में हमेशा रहेगी।
सच कहते हैं हम आपको इक पल न भूल पाएंगे।
मुश्किलों में जो साथ दिया याद रहेगा।
गिरते हुए को जो हाथ दिया याद रहेगा।
आपकी जगह जो भी आये वो आप जैसा ही हो।
हम बस ये ही चाहेंगे।
सच कहते हैं हम आपको इक पल न भूल पाएंगे।
आप जायेंगे तो कोई और आयेंगे।
मगर आपकी कमी इस दिल में हमेशा रहेगी।
सच कहते हैं हम आपको इक पल न भूल पाएंगे।
मुश्किलों में जो साथ दिया याद रहेगा।
गिरते हुए को जो हाथ दिया याद रहेगा।
आपकी जगह जो भी आये वो आप जैसा ही हो।
हम बस ये ही चाहेंगे।
सच कहते हैं हम आपको इक पल न भूल पाएंगे।
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